The calm chaos of the ocean
the one I reside in
is being undone
by my pain
Can I rise above this pain ?
by understanding it
becoming one with it
being coherent with it
& then,
finally,
realize the learning from it
I am on the journey to self-realization
can I keep this in my realization ?
every moment of my existence
बुधवार, 22 अप्रैल 2009
मंगलवार, 27 जनवरी 2009
ॐ नमः शिवाय ॐ विश्णय नमः
ॐ नमः शिवाय ॐ विश्नाय नमः
इस उपाधि की स्म्रद्धा
का स्मरण कर के
मैं जाग्रति की मनोकामना रखता हूँ
अपने अन्तर के ज्ञान, की उपासना को
इस परिपक्व विज्ञान, की रोशनी से
इक नया मार्ग, इक नयी दृष्टि
और,
इस ज्ञान की गहराई, की नयी नींव
खोजने की आशा रखता हूँ
मैं मुझे, और मेरे परिश्रम को
तेरे हवाले करता हूँ
मैं मुझे, और मेरे परिश्रम को
तेरे हवाले करता हूँ
इस उपाधि की स्म्रद्धा
का स्मरण कर के
मैं जाग्रति की मनोकामना रखता हूँ
अपने अन्तर के ज्ञान, की उपासना को
इस परिपक्व विज्ञान, की रोशनी से
इक नया मार्ग, इक नयी दृष्टि
और,
इस ज्ञान की गहराई, की नयी नींव
खोजने की आशा रखता हूँ
मैं मुझे, और मेरे परिश्रम को
तेरे हवाले करता हूँ
मैं मुझे, और मेरे परिश्रम को
तेरे हवाले करता हूँ
सोमवार, 24 नवंबर 2008
om namah shivay om vishnay namah
in the realm of
my dreams
my absent-mindedness
I enjoy
the most
my accomplishments
in the realm of
these accomplishments
I enjoy
the most
the MYSELF
the ME,
the little
is lost
in the US,
with the ALL,
THE ABSOLUTE
so I say,
I do not then,
enjoy the ME
rather,
I ENJOY THE ABSOLUTE
thank you my friends,
AND WELCOME FOREVER
om namah shivay om vishnay namah
a pair of open eyes
against,
the whole universe
dimensions,
being attached to
the dimensionless
the immeasurable
I bow
to my vision
and then,
I bow further
to the Universe
thus,
my pair of eyes
FOR,
the Universe
and hence,
I close my eyes
while I bow,
to the Universe
शुक्रवार, 21 नवंबर 2008
MY HUMANITY
My Humanity
when blends
&,
is lost in Space
in countless dimensions
in unknown, abstract Physics
then,
I realize My Humanity
the needs, the wants
of me, the Human
are so easily,
met,
by My Humanity
My Humanity
My Humanity is The Universe
do you now realize how POWERFUL I AM ?
do i now realize how POWERFUL YOU ARE ?
i shall leave you with these questions,
while I ENJOY MY HUMANITY
:-)
सोमवार, 27 अक्टूबर 2008
ॐ नमः शिवाय ॐ विश्णय नमः
समय से कैसा परिचय
अपरिचित रहने की कोशिश है
सुख से संसार को भरने के लिए
अपने भीतर सुख खोजने की कोशिश है
कोशिश है, आसमान छूने की नही
आसमान बनने की कोशिश है
कोशिश, कोशिश, कोशिश
कोशिशों से अपरिचित
इक ऐसा स्वरुप खोजने की कोशिश है
की फिर कभी कोशिश न करनी परे
की वहां पहुँचने की कोशिश है
की वहां पहुँचने की कोशिश है
ॐ नमः शिवाय ॐ विश्णय नमः
कुछ सोचा तो आखें भर आयी
ज़िन्दगी बेमतलब-सी समझ आयी
कुछ और सोचा तो मुसीबत सामने ही नज़र आयी
समझ लो ज़िन्दगी से बेहतर,
मौत नज़र आयी
इन् विचारों, आशाओं, की लुका-छुपी में
मुझे तेरी ज़रूरत नज़र आयी
अपनी आवाज़ में तेरी गूँज नज़र आयी
मेरी दिशा में रौशनी छिड़क
मेरे सफर में साथ चल
अपना साथ दे,
मेरे साथ चल
हे प्रभु, मुझे जाग्रति दे
ज़िन्दगी बेमतलब-सी समझ आयी
कुछ और सोचा तो मुसीबत सामने ही नज़र आयी
समझ लो ज़िन्दगी से बेहतर,
मौत नज़र आयी
इन् विचारों, आशाओं, की लुका-छुपी में
मुझे तेरी ज़रूरत नज़र आयी
अपनी आवाज़ में तेरी गूँज नज़र आयी
मेरी दिशा में रौशनी छिड़क
मेरे सफर में साथ चल
अपना साथ दे,
मेरे साथ चल
हे प्रभु, मुझे जाग्रति दे
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